अल्मोड़ा : अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के अच्छरौन में जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एक व्यक्ति ने निजी रिसॉर्ट के निर्माण के लिए सड़क बनाने की आड़ में कई हरे-भरे पेड़ों को काट डाला। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और वन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की।
कैसे खुली पेड़ों की अवैध कटाई की पोल?
ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ दिनों से क्षेत्र में एक कथित सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। लेकिन जब उन्होंने गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि यह सड़क वास्तव में एक निजी रिसॉर्ट तक पहुंचने के लिए बनाई जा रही थी। इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़क गया और उन्होंने मौके पर पहुंचकर इसका विरोध शुरू कर दिया।
वन पंचायत की जमीन पर कब्जे की साजिश?
यह पूरा मामला वन पंचायत की भूमि से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ प्रभावशाली लोग जंगल को नुकसान पहुंचाकर इस जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से सड़क निर्माण की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए।
वन विभाग को जब इस घटना की सूचना मिली, तो उन्होंने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अवैध कटाई की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का बड़ा ऐलान – नहीं होने देंगे जंगल की बर्बादी
इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे जंगल की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। महिलाओं ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और चेतावनी दी कि यदि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता, तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
वन्यजीवों और पर्यावरण पर खतरा
पर्यावरणविदों का कहना है कि इस तरह की अवैध कटाई से क्षेत्र की पारिस्थितिकी प्रणाली को गंभीर नुकसान हो सकता है। जंगलों का विनाश न केवल हरियाली को खत्म करता है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी यह बड़ा खतरा बन जाता है।
सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो जंगल की जमीन को इस तरह कब्जाने की घटनाएं बढ़ती रहेंगी।
इस दौरान रोहन बिष्ट , नवीन रावत , कैलाश रावत सतीश कुमार, अरविंद बिष्ट ,नीरज ,वीरू,सचिन समेत अन्य ग्रामवासियों ने प्रशासन को चेतावनी दी की अगर उक्त संबंध में कार्यवाही नही की गयी तो बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जायेगा ।
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