देहरादून, 24 फरवरी 2025: उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर सियासी घमासान जारी है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के हालिया बयान ने इस विवाद को और हवा दे दी है। भट्ट ने कहा था कि भू-कानून के मुद्दे पर “दुकानदारी” करने वालों की कमाई बंद हो गई है, क्योंकि उन्हें मुद्दा उठाने के लिए पैसे मिलते थे। उनके इस बयान पर जनता, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
लुसून टोड़रिया का तीखा पलटवार
मूल निवास भू-कानून संघर्ष समन्वय समिति के सह-संयोजक लुसून टोड़रिया ने महेंद्र भट्ट के बयान को अपमानजनक बताते हुए कहा,
“बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राज्य के मूल निवासियों की एकता से इतने बौखला क्यों गए हैं कि उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं? अगर भू-कानून और मूल निवास की मांग करने वालों को पैसा मिलता है, तो जनता के सामने सबूत पेश करें कि किसे, कितना और कब पैसा मिला?”
उन्होंने आगे कहा कि भू-कानून की मांग को लेकर हजारों की संख्या में उत्तराखंड की जनता सड़कों पर उतरी थी।
“क्या बीजेपी यह दावा करेगी कि उन सभी को पैसे मिले थे? अगर आपकी पार्टी के कार्यकर्ता भी इन रैलियों में शामिल हुए, तो क्या उन्हें भी पैसा मिला?”
“संयम की परीक्षा मत लो, वरना पूरा उत्तराखंड सड़कों पर होगा”
लुसून टोड़रिया ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा,
“हमारे संयम की परीक्षा मत लो। अगर मूल निवासियों की मांग को बदनाम करने की कोशिश हुई, तो पूरा उत्तराखंड एकजुट होकर सड़कों पर आ जाएगा। जनता अपने हक के लिए लड़ना जानती है, और अगर सरकार ने इस तरह के अपमानजनक बयान जारी रखे, तो विरोध और तेज होगा।”
विपक्ष ने भी बीजेपी को घेरा
महेंद्र भट्ट के बयान के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने कहा,
“बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जनता की आवाज को ‘दुकानदारी’ कहकर अपमानित कर रहे हैं। उत्तराखंड के लोग अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, यह कोई व्यापार नहीं, बल्कि हक की लड़ाई है।”
वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता मोहन भंडारी ने कहा कि सरकार को भू-कानून पर लोगों की चिंताओं को दूर करने के बजाय, उन्हें बदनाम करने में दिलचस्पी है।
“सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस आधार पर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं?”
भू-कानून पर बढ़ता विवाद
उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने और बेचने को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। कई संगठनों ने सख्त भू-कानून की मांग की थी, ताकि राज्य की सांस्कृतिक और भौगोलिक संरचना सुरक्षित रहे। हालांकि, बीजेपी सरकार द्वारा हाल में किए गए कुछ संशोधनों से यह विवाद और तेज हो गया है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोग इसे लोकतांत्रिक आवाजों का अपमान बता रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट अपने बयान पर कायम रहते हैं या सफाई देते हैं, और क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई नया कदम उठाती है।
पहाड़पन की खबरें आपको कैसी लगती हैं? हमें व्हाट्सएप पर अवश्य साझा कीजिए!
अब पहाड़पन पर आप अपने व्यवसाय का भी प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।
📞 +917409347010
📞 +917088829995
Leave a Reply